Purano ka saar

अठारह महापुराण: सनातन ज्ञान का विराट विश्वकोश (एक नई दृष्टि)

भारत की आध्यात्मिक परंपरा में पुराण केवल कथाएँ नहीं हैं — वे हमारी सभ्यता का सांस्कृतिक डीएनए हैं। वेदों का गूढ़ ज्ञान जब लोकभाषा में, उदाहरणों और कथाओं के माध्यम से जन-जन तक पहुँचा, तो वह पुराण कहलाया। परंपरा के अनुसार इनका संकलन महर्षि वेदव्यास ने किया।

इन्हें समझना सनातन परंपरा की आत्मा को समझने जैसा है। आइए, हर उस बात से परे जो आपने अब तक जानी होगी, पुराणों की दुनिया में एक नए सिरे से प्रवेश करते हैं, जैसे पहली बार कोई नया ग्रह खोज रहे हों 

कुल 18 महापुराण हैं, जो सृष्टि से लेकर समाज, धर्म, विज्ञान, चिकित्सा, राजनीति, योग, मृत्यु और मोक्ष तक जीवन के हर आयाम को स्पर्श करते हैं।


पुराण क्या हैं? (सिर्फ कहानी नहीं, जीवन-दर्शन)

पुराण का शाब्दिक अर्थ है “प्राचीन” या “पुरानी कथा” । लेकिन ये केवल कहानियां नहीं हैं। पुराण वह सेतु हैं जो वेदों की कठिन भाषा और जटिल दर्शन को आम जनता की समझ में आने वाली सरल, रोचक और जीवंत कथाओं के रूप में ढालते हैं। वेद जहां सत्य के बीज हैं, वहीं पुराण उस बीज से उपजा विशाल वटवृक्ष है, जिसकी शाखाओं में लाखों कहानियां, चरित्र और रहस्य झूलते हैं 

पुराने जमाने के विद्वान पुराणों को केवल पाँच लक्षणों (पंचलक्षण) से समझाते थे :

  1. सर्ग: सृष्टि की रचना 
  2. प्रतिसर्ग: प्रलय के बाद पुन: सृष्टि 
  3. वंश: देवताओं और ऋषियों की वंशावली 
  4. मन्वन्तर: विभिन्न मनुओं के कालखंडों का वर्णन 
  5. वंशानुचरित: सूर्य और चंद्र वंश के राजाओं का इतिहास 

लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह परिभाषा अधूरी है? महर्षि वेदव्यास के पुत्र शुकदेव जी ने पुराणों के दस लक्षण (दशलक्षण) बताए हैं, जो इस विधा की गहराई को उजागर करते हैं। राजा परीक्षित को समझाते हुए वे कहते हैं कि पुराण सिर्फ इतिहास नहीं, बल्कि मोक्ष तक पहुंचने का मार्गदर्शक है :

  • सर्ग: प्रकृति और महत्तत्व आदि का सूक्ष्म सृजन 
  • विसर्ग: ब्रह्मा द्वारा स्थावर-जंगम जगत की रचना 
  • स्थान: सृष्टि के विभिन्न लोकों और उनकी सीमाओं का निर्धारण 
  • पोषण: ईश्वर की कृपा से सृष्टि का पालन और संरक्षण 
  • ऊति: कर्मों के फल और उनके प्रभाव का वर्णन 
  • मन्वन्तर: मनुओं के शासनकाल और उनके वंश की कथाएं 
  • ईशानुकथा: भगवान के अवतारों और उनकी लीलाओं का वर्णन 
  • निरोध: प्रलय के समय सब कुछ अपने में लीन कर लेने की ईश्वरीय शक्ति 
  • मुक्ति: जीव का अज्ञान से मुक्त होकर परमात्मा में स्थित होना 
  • आश्रय: जगत का आधारभूत परम तत्त्व (परब्रह्म), जिसके सहारे मुक्ति संभव है 

यह दस लक्षण ही पुराणों की सच्ची पहचान हैं। वे हमें सिखाते हैं कि ये ग्रंथ केवल मिथक नहीं, बल्कि ब्रह्मांड और चेतना के गहनतम रहस्यों को उजागर करने वाले शास्त्र हैं।

✍️ अठारह महापुराण: एक अनोखा सारांश

परंपरा के अनुसार 18 मुख्य पुराण (महापुराण) हैं, जिन्हें महर्षि वेदव्यास ने संकलित किया । इन्हें तीन श्रेणियों में बांटा गया है, जो तीन गुणों (सतोगुण, रजोगुण, तमोगुण) और तीन प्रमुख देवताओं (विष्णु, ब्रह्मा, शिव) से जुड़े हैं, लेकिन यह वर्गीकरण पूर्णतः स्पष्ट नहीं है क्योंकि सभी पुराणों में सभी देवताओं की महिमा का गुणगान मिलता है 

आइए, हर पुराण के सार को एक नई नजर से देखें:

🌸 विष्णु प्रधान पुराण (सात्त्विक)

क्रमपुराण का नामश्लोक संख्याएक नई दृष्टि में सारांश
1विष्णु पुराण23,000 यह पुराण भक्ति और दर्शन का अद्भुत संगम है। इसमें वर्णित वंशावलियाँ केवल राजाओं की सूची नहीं, बल्कि भारत की प्राचीन कालगणना का आधार हैं। इसमें वेदों के छह अंगों का वर्णन और कलियुग के लक्षण भी बताए गए हैं 
2नारदीय पुराण25,000 यह एक संवाद के रूप में है जहां नारद जी ऋषियों को ज्ञान देते हैं। सबसे खास बात यह है कि इसमें जगन्नाथ पुरी, द्वारका और बद्रीनाथ जैसे तीर्थों का विस्तृत वर्णन है, मानो कोई प्राचीन यात्रा गाइड हो 
3भागवत पुराण18,000 यह पुराणों का “मुकुट-मणि” है। यह महज कृष्ण-लीलाओं का ग्रंथ नहीं, बल्कि नवधा भक्ति का विज्ञान है। इसमें वर्णित “वैकुण्ठ के द्वारपालों की कथा” (जय-विजय) हमें सिखाती है कि रावण और हिरण्यकशिपु जैसे राक्षस भी भगवान के परम भक्त थे, बस उनकी भक्ति का स्वरूप द्वेष के वेश में था 
4गरुड़ पुराण19,000 इसे मृत्यु का विज्ञान कहा जाए तो गलत न होगा। यह एकमात्र ऐसा ग्रंथ है जो मृत्यु के बाद आत्मा की यात्रा, विभिन्न योनियों और कर्मों के फल का इतना विस्तृत वर्णन करता है। हिंदू परिवारों में मृत्यु के बाद इसे पढ़ने की परंपरा इसलिए है ताकि जीवित लोग जीवन और मृत्यु के रहस्य को समझ सकें 
5पद्म पुराण55,000 यह विशालकाय ग्रंथ विषयों की विविधता के लिए जाना जाता है। इसमें एकादशी का माहात्म्य, विभिन्न व्रत और कथाएं हैं। खास बात यह कि इसमें रामायण का भी एक संस्करण मिलता है, जो वाल्मीकि रामायण से कुछ भिन्न है 
6वाराह पुराण24,000 इसमें भगवान विष्णु के वराह अवतार की कथा है, लेकिन इसके साथ ही यह विभिन्न व्रतों (जैसे अनंत व्रत, करवा चौथ) की विधि और महिमा का एक प्रामाणिक ग्रंथ है 

🪷 ब्रह्मा प्रधान पुराण (राजस)

क्रमपुराण का नामश्लोक संख्याएक नई दृष्टि में सारांश
7ब्रह्म पुराण10,000 इसे “आदि पुराण” भी कहते हैं। यह उड़ीसा (आधुनिक ओडिशा) के पुरुषोत्तम क्षेत्र (जगन्नाथ पुरी) का सबसे प्राचीन और विस्तृत माहात्म्य प्रस्तुत करता है। इसमें युद्ध-कला और मंदिर निर्माण जैसे सांस्कृतिक विषय भी हैं 
8ब्रह्माण्ड पुराण12,000 जैसा नाम वैसा काम। यह ब्रह्मांड का नक्शा है। इसमें ब्रह्मांड की रचना, भूगोल और ब्रह्मांड विज्ञान का अद्भुत वर्णन है। इसमें ही “अद्भुत रामायण” और “ललिता सहस्रनाम” जैसे महत्वपूर्ण ग्रंथ शामिल हैं 
9ब्रह्मवैवर्त पुराण18,000 इसे “राधा-कृष्ण का प्रेम-दर्शन” कह सकते हैं। यह बताता है कि प्रकृति, पुरुष और जगत की उत्पत्ति कैसे हुई। इसमें राधा और कृष्ण की लीलाओं का इतना मार्मिक और दार्शनिक वर्णन है कि भक्ति रस से सराबोर हो जाना पड़ता है 
10मार्कण्डेय पुराण9,000 इसमें एक अनोखी बात यह है कि यह संवाद मार्कण्डेय ऋषि और उनके शिष्यों के बीच है। इसमें “दुर्गा सप्तशती” या “चंडी पाठ” शामिल है, जो देवी की महिमा का सबसे प्रसिद्ध ग्रंथ है। माना जाता है कि यह अंश अपने आप में संपूर्ण है और इसके पाठ से सभी इच्छाएं पूर्ण होती हैं 
11भविष्य पुराण14,500 यह “भविष्य का इतिहास” है। इसमें राजाओं के भविष्य के वंशों का वर्णन है। हैरानी की बात यह है कि इसमें ईसा मसीह (ईसा मसीह) और मूसा (मूसा) जैसे विदेशी धर्मगुरुओं और रानी विक्टोरिया तक का उल्लेख मिलता है, जिससे पता चलता है कि यह समय-समय पर परिवर्धित होता रहा 
12वामन पुराण10,000 यह भगवान विष्णु के वामन अवतार की कथा तो है ही, साथ ही इसमें शिव और देवी पार्वती की कथाओं का भी बाहुल्य है। यह दर्शाता है कि पुराण किस तरह विभिन्न मतों के बीच सामंजस्य स्थापित करते हैं 

⚡ शिव प्रधान पुराण (तामस)

क्रमपुराण का नामश्लोक संख्याएक नई दृष्टि में सारांश
13मत्स्य पुराण14,000 यह केवल मत्स्य अवतार की कथा नहीं है, बल्कि यह प्राचीन भारत का सांस्कृतिक विश्वकोश है। इसमें मंदिर निर्माण, मूर्तिकला, दान के नियम, राजधर्म और यहां तक कि रत्न परीक्षा का भी विस्तृत वर्णन है 
14कूर्म पुराण17,000 इसमें भगवान विष्णु के कूर्म (कछुआ) अवतार की कथा है। परंतु यह एक गहन दार्शनिक ग्रंथ भी है जिसमें ज्ञान-योग, कर्म-योग और भक्ति-योग का समन्वय है। इसमें धन्वंतरि की उत्पत्ति और आयुर्वेद के रहस्य भी बताए गए हैं 
15लिंग पुराण10,000 यह शिव के निराकार-साकार स्वरूप ‘लिंग’ का रहस्य बताता है। यह स्पष्ट करता है कि लिंग केवल एक प्रतीक नहीं, बल्कि वह ब्रह्मांडीय स्तंभ है, जिसका न आदि है न अंत। इसमें गायत्री मंत्र की महिमा और नृसिंह अवतार की कथा भी है 
16शिव पुराण24,000 यह शिव-भक्ति का सर्वोत्कृष्ट ग्रंथ है। इसे छह संहिताओं में बांटा गया है, जिनमें शिव के विभिन्न रूपों (शिव, लिंग, उमा, स्कंद आदि) की उपासना पद्धति और कथाओं का विस्तार से वर्णन है। यह बताता है कि शिव संहारक के साथ-साथ सृष्टिकर्ता और पालनकर्ता भी हैं 
17स्कन्द पुराण81,000 यह सबसे बड़ा पुराण है, मानो एक विशाल पुस्तकालय हो। यह पूर्णतः तीर्थों और महात्म्यों का विश्वकोश है। इसमें भारत के कोने-कोने के तीर्थों, विशेषकर शिव और स्कन्द (कार्तिकेय) से जुड़े स्थानों की कथाएं और माहात्म्य वर्णित हैं। कहा जाता है कि यह पुराण ही वास्तविक “तीर्थ-दर्शन” है 
18अग्नि पुराण15,400 यह अग्निदेव द्वारा कहे गए ज्ञान का संग्रह है, इसलिए यह विषयों की विविधता के लिए जाना जाता है। इसमें न केवल धार्मिक विधियां हैं, बल्कि राजनीति, चिकित्सा, व्याकरण, युद्ध-कला, कविता और यहां तक कि शालिग्राम की पहचान का भी वर्णन है। यह एक व्यावहारिक मार्गदर्शिका है 

आधुनिक जीवन में पुराणों का महत्व

✔ जीवन प्रबंधन
✔ नैतिक शिक्षा
✔ नेतृत्व और समाज निर्माण
✔ संकट प्रबंधन (समुद्र मंथन)
✔ मृत्यु के बाद की समझ (गरुड़ पुराण)

🌍 पुराणों का अनोखा ब्रह्मांड विज्ञान और इतिहास

पुराणों में वर्णित ब्रह्मांड हमारी आधुनिक कल्पना से परे है। यह सात द्वीपों (सप्तद्वीप) से घिरा हुआ है, जिनमें से प्रत्येक अलग-अलग महासागरों (क्षार, इक्षुरस, सुरा, घृत, दधि, क्षीर, स्वादु जल) से घिरा है। केंद्र में स्थित है सुमेरु पर्वत, जो सभी ग्रहों का ध्रुव है 

  • काल गणना का अद्भुत गणित: पुराणों का समय चक्र अविश्वसनीय रूप से विशाल है। एक महायुग (सतयुग, त्रेता, द्वापर, कलियुग) देवताओं के 12,000 वर्षों का होता है, जो मनुष्यों के 43,20,000 वर्षों के बराबर है । ऐसे 1000 महायुग मिलकर ब्रह्मा का एक दिन (कल्प) बनाते हैं। इस हिसाब से ब्रह्मा की आयु 100 वर्ष है, और हम अभी उनके 51वें वर्ष में हैं! यह समय का ऐसा विराट दृष्टिकोण है जो हमें हमारे अस्तित्व की तुच्छता और अनंतता का अहसास कराता है 
  • वंशावलियां – इतिहास का आधार: पुराणों में सूर्य और चंद्र वंश की जो वंशावलियां मिलती हैं, वे भारत के प्राचीन इतिहास को जोड़ने की कुंजी हैं। इनमें महाभारत और रामायण के युद्धों का उल्लेख तो है ही, साथ ही नंद, मौर्य, शुंग, गुप्त जैसे ऐतिहासिक राजवंशों का भी वर्णन है, जिससे इनकी ऐतिहासिक प्रासंगिकता सिद्ध होती है 

💎 एक नए दृष्टिकोण का निमंत्रण

पुराणों को पढ़ना सिर्फ कहानियां सुनना नहीं है, बल्कि यह एक आत्म-यात्रा है। जैसा कि शुकदेव जी कहते हैं, इनका उद्देश्य सिर्फ ज्ञान देना नहीं, बल्कि मुक्ति का “आश्रय” (सहारा) प्रदान करना है 

कई लोग पुराणों की कथाओं को केवल मिथक या कल्पना कहकर खारिज कर देते हैं, लेकिन यह एक सतही दृष्टिकोण है। इन कथाओं को एक गहरे प्रतीकात्मक स्तर पर समझा जाना चाहिए। देवताओं और असुरों का युद्ध केवल बाहरी लड़ाई नहीं, बल्कि हमारे भीतर चल रहे सत और असत, प्रकाश और अंधकार के शाश्वत संघर्ष का रूपक है 

पुराण हमारी सांस्कृतिक चेतना का अटूट हिस्सा हैं। वे हमें एक ऐसा चश्मा देते हैं जिससे हम न केवल ब्रह्मांड को, बल्कि स्वयं को भी एक नई रोशनी में देख सकते हैं। यह लेख मात्र एक द्वार है, असली यात्रा तो अभी शुरू होनी है।

FAQ

Q1. 18 पुराणों के नाम क्या हैं?

ऊपर दी गई सूची में सभी 18 महापुराणों के नाम दिए गए हैं।

Q2. सबसे बड़ा पुराण कौन सा है?

स्कन्द पुराण सबसे बड़ा पुराण माना जाता है।

Q3. गरुड़ पुराण कब पढ़ा जाता है?

आमतौर पर मृत्यु के बाद के संस्कारों में इसका पाठ होता है।

Q4. पुराण किसने लिखे?

परंपरा के अनुसार महर्षि वेदव्यास ने संकलन किया।

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