Hemamalini Stotra in Hindi

🌺 श्री हेमामालिनी स्तोत्रम् — स्वर्णमयी लक्ष्मी साधना का दिव्य रहस्य

🪔 परिचय: हेमामालिनी स्तोत्र क्या है?

Hemamalini Stotra in Hindi; देवी महालक्ष्मी को समर्पित एक अद्भुत संस्कृत स्तोत्र है, जो उनके स्वर्णमयी (सोने जैसी) आभा और समृद्धि के स्वरूप का वर्णन करता है।
‘हेम’ का अर्थ है सोना और ‘मालिनी’ का अर्थ है मालाओं से अलंकृत देवी
यह स्तोत्र माँ लक्ष्मी के उस रूप की साधना है, जो धन, सौभाग्य, सफलता और सिद्धि प्रदान करती हैं।

।। हेमामालिनी स्तोत्रम् ।।

ध्यानं-
हेमवर्णां चतुर्बाहुं रत्नसिंहासनस्थिताम्।
पद्महस्ता वराभीति करां दन्तोल्लासितविग्रहम्।।

कौस्तुभाभरणोपेतां कीर्तिमालाविभूषिताम्।
त्रैलोक्यजननीं वन्दे हेममालिन्यरूपिणीम्।।

स्तोत्रं-
हेमवर्णे हेममाले हेमरत्नविभूषिते।
हेमसिंहासिनि त्वं वै हेमलक्ष्मि नमोऽस्तु ते।।१।।

सुवर्णशृङ्गारमयीं कनकद्युति भूषिताम्।
रत्नराजिविलसिनीं हेमलक्ष्मीं नमाम्यहम्।।२।।

हेमजटा जटाजूटे हेमकुण्डलमण्डिता।
हेमांगदे हेमनूपुरे हेमकेयूरमण्डिता।।३।।

हेमसारस्वती संयुक्ता हेमविष्णुपरायणा।
हेमपद्मासनारूढा हेमनादविनादिनी।।४।।

हेमवर्षाय च या नित्यं हेमकुबेरवन्दिता।
हेमसंकल्पसम्पन्ना हेमकान्तिसमुद्धिता।।५।।

हेमवर्णां शुभां देवीं रत्नमाल्यविभूषिताम्।
कमलासनसंस्थां च भजे हेममालिनीं हरिप्रयाम्।।६।।

सुवर्णसिंहासनस्थां स्वर्णकेयूरमण्डिताम्।
स्वर्णकान्तिं समुद्धोष्यं स्वर्णलक्ष्मीं नमाम्यहम्।।७।।

हिरण्यवर्णां हरिणीं सुवर्णाभरणोज्ज्वलाम्।
चतुर्भुजां महालक्ष्मीं जयन्तीं नम्रतां गतः।।८।।

हेममाल्यविलासिनीं रत्नसारविभूषिताम्।
वज्रकान्तिं प्रदायिन्यां नमामि तां सुरेश्वरीम्।।९।।

काञ्चनाभरणां देवीं चन्द्रकोटिसमप्रभाम्।
हिरण्मयीं श्रीं ह्रीं क्लीं लक्ष्मीं नमाम्यहं सदा।।१०।।

सर्वरत्ननिवासिन्यै सुवर्णस्रग्धरायै च।
कमलाक्ष्यै महाशक्त्यै लक्ष्म्यै सौम्यायै नमः।।११।।

स्वर्णसिन्धुतटायां या वसन्ति सदा सुरा।
सा लक्ष्मीः पद्मपुष्पस्था मां कुर्यात्सर्वसंपदा।।१२।।

हेमद्वीपविहारिण्यै काञ्चनदुर्गवासिनीम्।
कुलदेवीं जगन्मातर्मां पालय शुभप्रदे।।१३।।

हेमपुष्पैः समर्च्यां तां रत्नदीपैः सुसन्तुष्टाम्।
नानाफलप्रदां देवीं वन्दे हेममालिनीम्।।१४।।

हिरण्यकश्यपद्वेषीं विष्णुप्रियां महेश्वरीम्।
स्वर्णसंपत्प्रदां लक्ष्मीं नमामि भक्तवत्सलाम्।।१५।।

काञ्चनस्रग्धरां देवीं रत्नसिंहासनस्थिताम्।
वेदविद्यामयीं लक्ष्मीं नमामि सर्वसिद्धये।।१६।।

स्वर्णकीर्तिं प्रयच्छन्तीं स्वर्णरूपधरां शुभाम्।
स्वर्णलक्ष्मीं नमाम्यद्य सुवर्णेन समृद्धये।।१७।।

रत्नमालां च या धत्ते स्वर्णमालां च शोभनाम्।
सा लक्ष्मीर्मम सर्वार्थं साधयत्वप्रणम्यताम्।।१८।।

श्रीशक्तिं रत्नगर्भां च सुवर्णगात्रिनीं शुभाम्।
श्रीं ह्रीं बीजसमायुक्तां लक्ष्मीं वन्दे पुनः पुनः।।१९।।

स्वर्णराशिं करस्थां तां रत्नकुंभैः समन्विताम्।
ददातु मे हेमलक्ष्मीः सर्वकामफलप्रदाम्।।२०।।

हेमलता समुत्पन्ना कमलात्सहिते प्रभो।
त्वं मे लक्ष्मीः सदा तिष्ठ न गृहं मम शोभय।।२१।।

काञ्चनप्रभया युक्ता चन्द्रमण्डलमध्यगा।
सा लक्ष्मीर्मे गृहे नित्यं भासमानं कुरु प्रभो।।२२।।

स्वर्णपर्वतसङ्काशां स्वर्णतोरणमण्डिताम्।
स्वर्णकलशहस्तां तां वन्दे हेममयीं शुभाम्।।२३।।

स्वर्णरेखा समुद्भूतां ब्रह्मविद्याप्रकाशिनीम्।
लक्ष्मीं ब्रह्मस्वरूपां तां नमामि सिद्धिदायिनीम्।।२४।।

काञ्चनाङ्गीं वरांगीं च रत्नवेषविभूषिताम्।
हेममालिनी लक्ष्मीं च सर्वशक्तिस्वरूपिणीम्।।२५।।

श्रीं ह्रीं क्लीं हेममालिन्यै नमः कार्यसिद्धये।
जप्यं स्तोत्रं मया प्रोक्तं लक्ष्मीप्रीत्यै सदा पठेत्।।२६।।

                                             ।। इति श्री हेमा-मालिनी स्तोत्रं संपूर्णम् ।।

🌼 स्तोत्र का अर्थ और आध्यात्मिक महत्व

हेमामालिनी स्तोत्र में देवी लक्ष्मी को —

  • स्वर्णाभा वाली,
  • रत्नजटित वस्त्रों से सुसज्जित,
  • पद्मासना और रत्नसिंहासन पर विराजमान बताया गया है।

यह स्तोत्र न केवल भौतिक समृद्धि बल्कि आध्यात्मिक वैभव भी प्रदान करता है।
स्तोत्र की प्रत्येक पंक्ति देवी की दिव्य ऊर्जा को जाग्रत करती है।

“हेमवर्णां शुभां देवीं रत्नमाल्यविभूषिताम्।
कमलासनसंस्थां च भजे हेममालिनीं हरिप्रयाम्॥”

इस पंक्ति में देवी की सोने जैसी देह, रत्नमालाओं की आभा और विष्णु प्रियता का वर्णन है — जो बताती है कि लक्ष्मी की उपासना से सद्भाव, सौभाग्य और धन की वृद्धि होती है।


💰 हेमामालिनी स्तोत्र के लाभ (Benefits of Hemamalini Stotram)

  1. धन और वैभव की प्राप्ति
    घर या व्यवसाय में धन वृद्धि, सौभाग्य और संपन्नता आती है।
  2. ऋण मुक्ति और समृद्धि
    यह स्तोत्र कर्ज, आर्थिक अड़चनों और अभावों को दूर करता है।
  3. मान-सम्मान की प्राप्ति
    जीवन में यश, कीर्ति और प्रतिष्ठा का विस्तार होता है।
  4. सुखद पारिवारिक जीवन
    गृहस्थ जीवन में सौहार्द और शांति बढ़ती है।
  5. आध्यात्मिक उन्नति
    साधक के भीतर की ऊर्जा जागृत होती है और मन स्थिर होता है।

🕉️ हेमामालिनी स्तोत्र पाठ विधि

📿 सर्वोत्तम समय: शुक्रवार, पूर्णिमा या धनतेरस का दिन
🌸 सामग्री: पीले पुष्प, हल्दी, कुमकुम, दीपक, कमल गट्टे की माला
🪔 विधि:

  1. प्रातः स्नान करके स्वच्छ पीले वस्त्र धारण करें।
  2. माँ लक्ष्मी की मूर्ति या चित्र के समक्ष दीप जलाएं।
  3. “ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं महालक्ष्म्यै नमः” का 11 बार जप करें।
  4. तत्पश्चात हेमामालिनी स्तोत्रम् का पाठ करें।
  5. पाठ के बाद प्रसाद अर्पण करें और धन वृद्धि की प्रार्थना करें।

🌹 स्तोत्र के रहस्य और सिद्धि

यह स्तोत्र वेद-तंत्र संयुक्त साधना है, जिसमें हेम बीज, श्री बीज और ह्रीं क्लीं मंत्रों का प्रयोग होता है।
इन मंत्रों की शक्ति से साधक के जीवन में आर्थिक स्थिरता, आत्मिक शांति और ईश्वरीय कृपा आती है।

“श्रीं ह्रीं क्लीं हेममालिन्यै नमः कार्यसिद्धये।”
— यह श्लोक सिद्धि का मूलमंत्र माना गया है।


हेमामालिनी स्तोत्र का पाठ कब करें?

  • 🌕 शुक्रवार और पूर्णिमा को इसका पाठ अत्यंत फलदायी होता है।
  • 🌺 धनतेरस, दीपावली, अक्षय तृतीया जैसे शुभ दिनों में इसका विशेष फल मिलता है।
  • 🏡 गृहप्रवेश या व्यवसाय प्रारंभ से पहले भी इसका पाठ शुभ होता है।

🔮 निष्कर्ष: Hemamalini Stotra in Hindi

श्री हेमामालिनी स्तोत्रम्” केवल धन प्राप्ति का स्तोत्र नहीं है —
यह माँ लक्ष्मी के दिव्य स्वर्णमयी स्वरूप का ध्यान है।
जो भी व्यक्ति इस स्तोत्र का श्रद्धा और नियम से पाठ करता है,
उसे जीवन में अखंड समृद्धि, सौभाग्य, और ईश्वरीय कृपा की प्राप्ति होती है।

🌸 “जय श्री हेममालिनी लक्ष्मी माता — धन, ज्ञान और शांति की अधिष्ठात्री।”

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