Ramnavami

🌼 Ramnavami 2026: महत्व, पूजा विधि और शुभ मुहूर्त | चैत्‍र नवरात्रि का पावन समापन 🌼

भारत त्योहारों की भूमि है, लेकिन रामनवमी (Ramnavami) का दिन करोड़ों हृदयों में एक विशेष आध्यात्मिक उत्साह का संचार करता है। यह केवल एक तिथि नहीं, बल्कि उस समय का प्रतीक है जब मर्यादा, धर्म और करुणा की साक्षात् मूर्ति, भगवान विष्णु के सातवें अवतार, प्रभु राम ने अयोध्या की धरा पर जन्म लिया था 

यह पर्व चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को मनाया जाता है, जो आमतौर पर मार्च या अप्रैल के महीने में आता है। इसी दिन चैत्र नवरात्रि का भी समापन होता है, जिससे इसका महत्व और भी बढ़ जाता है । इस शुभ अवसर पर हम न सिर्फ प्रभु राम के जीवन और शिक्षाओं का स्मरण करते हैं, बल्कि उनके परम भक्त, हनुमान जी की अनन्य भक्ति और शक्ति को भी नमन करते हैं 

इस ब्लॉग पोस्ट में हम रामनवमी के विभिन्न पहलुओं को विस्तार से समझेंगे, जिसमें इसका दैवीय इतिहास, धार्मिक महत्व, पूजन विधि और इससे जुड़ी पौराणिक कथाएँ शामिल हैं।

रामनवमी (Ramnavami) का दैवीय इतिहास (दैविक कारण)

रामनवमी (Ramnavami) का पर्व भगवान राम के धरती पर अवतरित होने की दिव्य गाथा से जुड़ा है। इसके पीछे मुख्य दैवीय कारण राक्षसी शक्तियों का नाश और धर्म की स्थापना करना था 

अवतरण की कथा

पौराणिक कथाओं के अनुसार, अयोध्या के राजा दशरथ के यहाँ संतान नहीं थी। उनकी तीन रानियाँ थीं – कौशल्या, सुमित्रा और कैकेयी। संतान प्राप्ति के लिए राजा दशरथ ने अपने कुलगुरु ऋषि वशिष्ठ की सलाह पर ऋषि श्रृंगी के निर्देशन में पुत्रकामेष्टि यज्ञ करवाया 

यज्ञ के समापन पर अग्निदेव स्वयं प्रकट हुए और उन्होंने राजा दशरथ को खीर का पात्र प्रदान किया। ऋषि श्रृंगी के कहने पर राजा दशरथ ने यह पवित्र खीर अपनी तीनों रानियों में बाँट दी। खीर ग्रहण करने के कुछ समय बाद ही तीनों रानियाँ गर्भवती हो गईं 

नौ माह बाद चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को मध्याह्न में, जब सूर्य अपने चरम पर थे, कर्क लग्न और पुनर्वसु नक्षत्र में माता कौशल्या ने भगवान राम को जन्म दिया। उसी दिन माता कैकेयी ने भरत को और माता सुमित्रा ने जुड़वाँ पुत्रों लक्ष्मण और शत्रुघ्न को जन्म दिया 

हनुमान जी का संबंध

यह भी मान्यता है कि जब भगवान विष्णु ने राम के रूप में अवतार लिया, तब भगवान शिव ने भी हनुमान के रूप में जन्म लिया ताकि वे प्रभु राम की सेवा में सदा तत्पर रह सकें। यही कारण है कि हनुमान जी की भक्ति और समर्पण रामकथा का अभिन्न अंग बन गया 

रामनवमी (Ramnavami) का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व

रामनवमी का पर्व हिंदू धर्म में अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान रखता है। यह केवल एक जन्मोत्सव नहीं है, बल्कि यह आत्मचिंतन और साधना का भी पर्व है।

आध्यात्मिक महत्व

  • आदर्शों का प्रतीक: भगवान राम मर्यादा पुरुषोत्तम हैं – एक आदर्श पुत्र, आदर्श पति, आदर्श भाई और आदर्श राजा। उनके जीवन से हम कर्तव्यनिष्ठा, त्याग और सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा ले सकते हैं।
  • नवरात्रि का समापन: रामनवमी का दिन चैत्र नवरात्रि का नवाँ और अंतिम दिन होता है। इस दिन माँ दुर्गा के नौवें स्वरूप माँ सिद्धिदात्री की भी पूजा होती है। कहा जाता है कि भगवान राम ने भी रावण से युद्ध करने से पहले माँ दुर्गा की आराधना की थी 
  • पापों से मुक्ति: मान्यता है कि रामनवमी का व्रत और पूजा करने से व्यक्ति अपने सभी पापों से मुक्त हो जाता है और उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है 
  • तुलसीदास जी की रचना: गोस्वामी तुलसीदास जी ने इसी दिन से रामचरितमानस की रचना का आरंभ किया था, जिससे इस दिन का महत्व और बढ़ जाता है 

सामाजिक महत्व

रामनवमी (Ramnavami) सामाजिक समरसता का भी प्रतीक है। ऐसी मान्यता है कि जब समाज में छोटी जातियों को सम्मान नहीं मिलता था, उस समय रामनवमी ही ऐसा त्योहार था जिसे सभी जातियाँ एक साथ मिलकर मनाती थीं 

रामनवमी (Ramnavami) पूजा विधि: चरण-दर-चरण मार्गदर्शन

इस दिन भगवान राम की विधिवत पूजा करने से जीवन की सभी बाधाएं दूर होती हैं और घर में सुख-शांति का वास होता है। आइए विस्तार से जानें पूजा की संपूर्ण विधि 

पूजा की तैयारी

1. प्रातःकाल की दिनचर्या:

  • ब्रह्म मुहूर्त (सुबह 4-5 बजे) में उठें और स्नान करें 
  • स्वच्छ वस्त्र धारण करें। रामनवमी के दिन सफेद या पीले रंग के वस्त्र पहनना विशेष रूप से शुभ माना गया है, क्योंकि यह रंग भगवान राम को प्रिय हैं 
  • तांबे के लोटे में जल, लाल फूल और थोड़े चावल डालकर सूर्यदेव को अर्घ्य दें 

2. द्वार पूजन (उंबऱ्याचे पूजन):

  • सबसे पहले अपने घर के मुख्य द्वार को पानी से साफ करें 
  • द्वार पर हल्दी का लेप लगाएँ।
  • रंगोली से लक्ष्मी जी के पदचिह्न और स्वास्तिक बनाएँ 
  • द्वार पर हल्दी-कुमकुम लगाएँ। मान्यता है कि इस दिन हम प्रभु राम को अपने घर आमंत्रित करते हैं, इसलिए द्वार से ही पूजा की शुरुआत करनी चाहिए। द्वार को फूलों और आम के पत्तों के बंदनवार से सजाएँ 

3. पूजा स्थल की तैयारी:

  • घर के मंदिर या पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध करें 
  • एक चौकी पर लाल या पीला वस्त्र बिछाएँ और उस पर भगवान राम, माता सीता, लक्ष्मण और हनुमान जी की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें 
  • यदि संभव हो तो भगवान राम के बाल स्वरूप की मूर्ति को एक छोटे पालने (झूले) में रखें, क्योंकि इस दिन राम जन्मोत्सव मनाया जाता है 

आवश्यक पूजा सामग्री

रामनवमी (Ramnavami) पूजा के लिए निम्नलिखित सामग्री एकत्र करें :

  • राम दरबार का चित्र या मूर्तियाँ
  • गंगाजल
  • दूध, दही, घी, शहद, शक्कर (पंचामृत के लिए)
  • चंदन, हल्दी, कुमकुम, रोली
  • अक्षत (चावल)
  • पुष्प और माला (विशेषकर गुलाब, गेंदा और कमल)
  • तुलसी दल (अनिवार्य)
  • धूप, दीपक, कपूर, अगरबत्ती
  • नैवेद्य के लिए खीर, पंजीरी, फल, मिठाई
  • पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, शक्कर का मिश्रण)
  • सुपारी, लौंग, पान के पत्ते
  • पीला वस्त्र (भगवान को अर्पित करने के लिए)
  • रामायण या रामचरितमानस की पुस्तक
  • रामध्वज (घर की छत पर फहराने के लिए)

चरणबद्ध पूजा विधि

1: संकल्प
हाथ में जल, अक्षत और पुष्प लेकर व्रत और पूजा करने का संकल्प लें। भगवान राम का ध्यान करें और अपनी मनोकामना व्यक्त करें 

2: अभिषेक (स्नान)
भगवान राम की मूर्ति का पंचामृत से अभिषेक करें – पहले दूध, फिर दही, घी, शहद और शक्कर। अंत में गंगाजल या साफ पानी से स्नान कराएँ 

3: श्रृंगार और वस्त्रार्पण
भगवान को नए वस्त्र (विशेषकर पीले) पहनाएँ। उन्हें आभूषण, मुकुट और फूलों की माला पहनाएँ। तिलक लगाएँ 

4: षोडशोपचार पूजा
16 प्रकार की सामग्री से भगवान की पूजा करें। मुख्य रूप से निम्नलिखित अर्पित करें :

  • चंदन, रोली, कुमकुम, हल्दी लगाएँ
  • अक्षत (चावल) अर्पित करें
  • सुगंधित पुष्प और तुलसी दल चढ़ाएँ
  • धूप और दीप जलाएँ
  • फल और मिठाई का भोग लगाएँ

5: मंत्र जाप
पूजा के दौरान निम्नलिखित मंत्रों का जाप करें :

  • “ॐ राम रामाय नमः” – 108 बार जप करें
  • “श्री राम जय राम जय जय राम” – इस राम नाम का जाप करें
  • “रामाय रामभद्राय रामचंद्राय वेधसे। रघुनाथाय नाथाय सीताया पतये नमः।।”

चरण 6: पाठ और आरती

राम जन्मोत्सव का विशेष क्षण (मध्याह्न पूजा)

मान्यता है कि भगवान राम का जन्म मध्याह्न में हुआ था। इसलिए दोपहर 12 बजे के आसपास राम जन्मोत्सव मनाया जाता है 

  • ठीक 12 बजे के आसपास (मुहूर्त के अनुसार) भगवान राम की बाल मूर्ति वाले पालने को हल्के से झुलाएँ 
  • ‘जय श्री राम’ के जयकारे लगाएँ।
  • शंख, घंटा और भजनों के साथ उत्सव मनाएँ।
  • घर की छत पर भगवा ध्वज (रामध्वज) फहराएँ 

भोग और प्रसाद

भगवान राम को खीर और पंजीरी का भोग विशेष रूप से प्रिय है। आप निम्नलिखित चीजें भोग लगा सकते हैं :

  • खीर (चावल और दूध से बनी मिठाई)
  • पंजीरी (गेहूँ के आटे और गुड़ से बना मिष्ठान्न)
  • मीठा चावल (पनकम/पायसम)
  • पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, शक्कर)
  • ताजे फल
  • मिठाई

व्रत का पारण

यदि आपने व्रत रखा है तो अगले दिन सूर्योदय के बाद पारण करें। आमतौर पर नवमी या दशमी तिथि में पारण किया जाता है 

रामनवमी 2026: तिथि, शुभ मुहूर्त और पूजा का सही समय

धार्मिक पंचांग के अनुसार, इस दिन चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि का आरंभ 26 मार्च को सुबह 11:48 बजे होगा और इसका समापन 27 मार्च को सुबह 10:06 बजे होगा । उदया तिथि के अनुसार, रामनवमी 26 मार्च को ही मनाई जाएगी।

रामनवमी 2026 पूजा मुहूर्त

प्रभु राम का जन्म मध्याह्न काल में हुआ था, इसलिए यह समय पूजा के लिए सबसे शुभ माना जाता है । 2026 में विभिन्न मुहूर्त इस प्रकार हैं:

  • मध्याह्न मुहूर्त: सुबह 11:13 बजे से दोपहर 01:41 बजे तक 
  • मध्याह्न क्षण (जन्म क्षण): दोपहर 12:27 बजे 
  • ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:44 बजे से 05:30 बजे तक 
  • विजय मुहूर्त: दोपहर 02:20 बजे से 03:19 बजे तक 
  • अमृत काल: दोपहर 01:05 बजे से 02:38 बजे तक 
  • रवि योग: पूरे दिन 

सूर्योदय और सूर्यास्त का समय

  • सूर्योदय: प्रातः 06:17 बजे 
  • सूर्यास्त: सायं 06:36 बजे 

वैष्णव रामनवमी

कुछ वैष्णव परंपराओं में रामनवमी शुक्रवार, 27 मार्च 2026 को मनाई जाती है, जिसका मध्याह्न मुहूर्त भी लगभग यही रहता है 

भारत के विभिन्न क्षेत्रों में रामनवमी उत्सव

रामनवमी (Ramnavami) को मनाने का तरीका पूरे भारत में अलग-अलग है, जो हमारी विविध संस्कृति की सुंदरता को दर्शाता है:

  • अयोध्या (उत्तर प्रदेश): यहां यह पर्व सबसे भव्य रूप में मनाया जाता है। पूरे शहर को दीपों से सजाया जाता है, भव्य शोभा यात्राएं निकलती हैं और सरयू नदी के तट पर विशेष आरती होती है। राम जन्मभूमि परिसर में हजारों भक्त दर्शन के लिए आते हैं।
  • रामेश्वरम (तमिलनाडु): यहां भव्य रथयात्रा निकाली जाती है और भगवान राम का विशेष अभिषेक किया जाता है।
  • हैदराबाद (तेलंगाना): यहां रामनवमी के अवसर पर भव्य रामलीला का मंचन होता है और सजी-धजी झांकियां निकाली जाती हैं।
  • महाराष्ट्र: इस दिन व्रत रखा जाता है और ‘राम रक्षा स्तोत्र’ का पाठ किया जाता है। पुणे के ‘राम मंदिर’ और नासिक के ‘कालाराम मंदिर’ में विशेष आयोजन होते हैं।
  • आंध्र प्रदेश और तेलंगाना: यहां “श्री राम कल्याणम” का आयोजन किया जाता है, जिसमें भगवान राम और माता सीता के दिव्य विवाह का भव्य समारोह पूरे मंत्रोच्चार के साथ संपन्न कराया जाता है।
  • बिहार और झारखंड: ग्रामीण क्षेत्रों में रामनवमी के अवसर पर विशेष मेले लगते हैं और भव्य शोभा यात्राएं निकलती हैं, जिसमें हजारों लोग शामिल होते हैं।

विशेष कथाएँ और मान्यताएँ

सिंदूर का प्रसाद और हनुमान जी

रामनवमी (Ramnavami) के दिन हनुमान जी को सिंदूर चढ़ाने की विशेष परंपरा है। एक प्रसिद्ध कथा के अनुसार, एक बार माता सीता ने हनुमान जी को देखा कि वह अपने पूरे शरीर पर सिंदूर लगा रहे हैं। जब उन्होंने कारण पूछा, तो हनुमान जी ने कहा कि वह प्रभु राम की लंबी आयु के लिए ऐसा कर रहे हैं, जैसे माता सीता अपने सौभाग्य के लिए सिंदूर लगाती हैं। तब से हनुमान जी को सिंदूर अर्पित करने का विधान है, जो उनकी परम भक्ति और समर्पण का प्रतीक है।

जटायु की भक्ति

रामायण की एक और प्रेरक कथा जटायु की है। जब रावण माता सीता का हरण करके ले जा रहा था, तब गिद्धराज जटायु ने अपने प्राणों की परवाह किए बिना उन्हें बचाने का प्रयास किया। यद्यपि वह रावण से पराजित हो गए, लेकिन भगवान राम ने मरणासन्न जटायु से भेंट की और उन्हें मोक्ष प्रदान किया। यह कथा सिखाती है कि सच्ची भक्ति के लिए शक्ति नहीं, बल्कि समर्पण आवश्यक है।

निष्कर्ष: Ramnavami

रामनवमी (Ramnavami) केवल एक त्योहार नहीं है, बल्कि यह हमारी सांस्कृतिक चेतना का वह दिवस है जब हम मर्यादा, सत्य और धर्म के प्रतीक भगवान राम के जीवन से प्रेरणा लेते हैं। यह पर्व हमें सिखाता है कि कैसे एक आदर्श जीवन जीना चाहिए, कैसे कठिन परिस्थितियों में धैर्य और मर्यादा का पालन करना चाहिए।

इस दिन की गई सच्ची भक्ति और आराधना न केवल हमारे जीवन की बाधाओं को दूर करती है, बल्कि हमें आध्यात्मिक उन्नति के मार्ग पर भी अग्रसर करती है। भगवान राम के आदर्श – एक आदर्श पुत्र के रूप में पिता की आज्ञा का पालन, एक आदर्श भाई के रूप में भरत और लक्ष्मण के प्रति प्रेम, एक आदर्श पति के रूप में सीता माता के प्रति निष्ठा, और एक आदर्श राजा के रूप में प्रजा के प्रति कर्तव्य – आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं जितने त्रेता युग में थे।

हनुमान जी का जीवन हमें सिखाता है कि सच्ची भक्ति का अर्थ है, बिना किसी स्वार्थ के अपने इष्ट की सेवा करना और हर परिस्थिति में धर्म का साथ निभाना। उनकी अटूट निष्ठा, शक्ति और विनम्रता हम सभी के लिए प्रेरणा का स्रोत है 

आप सभी को रामनवमी (Ramnavami) की हार्दिक शुभकामनाएं। इस पावन अवसर पर प्रभु राम और हनुमान जी की कृपा आप सभी पर बनी रहे।

जय श्री राम! हनुमान भक्त!

रामनवमी 2026: अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

यहाँ रामनवमी से जुड़े सामान्य प्रश्नों के उत्तर दिए गए हैं, जो आपको इस पर्व को समझने और सही तरीके से मनाने में मदद करेंगे:

प्रश्न 1: रामनवमी 2026 कब है?

उत्तर: रामनवमी 2026 गुरुवार, 26 मार्च 2026 को मनाई जाएगी । चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि 26 मार्च को सुबह 11:48 बजे शुरू होकर 27 मार्च को सुबह 10:06 बजे समाप्त होगी। उदया तिथि के अनुसार, यह पर्व 26 मार्च को ही मनाया जाएगा।

प्रश्न 2: रामनवमी पूजा का शुभ मुहूर्त 2026 क्या है?

उत्तर: रामनवमी 2026 के लिए पूजा का सबसे शुभ मुहूर्त मध्याह्न काल है। यह सुबह 11:13 बजे से दोपहर 01:41 बजे तक रहेगा । प्रभु राम का जन्म मध्याह्न क्षण में हुआ था, जो इस दिन दोपहर 12:27 बजे है। इसके अतिरिक्त, ब्रह्म मुहूर्त सुबह 04:44 से 05:30 बजे तक और विजय मुहूर्त दोपहर 02:20 से 03:19 बजे तक है।

प्रश्न 3: रामनवमी का धार्मिक महत्व क्या है?

उत्तर: रामनवमी का पर्व भगवान विष्णु के सातवें अवतार, मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। यह दिन सत्य, धर्म और मर्यादा की स्थापना का प्रतीक है। मान्यता है कि इस दिन व्रत और पूजा करने से व्यक्ति के सभी पाप समाप्त हो जाते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है । साथ ही, यह चैत्र नवरात्रि का अंतिम दिन भी है, जिससे इसका महत्व दोगुना हो जाता है ।

प्रश्न 4: रामनवमी की पूजा विधि क्या है?

उत्तर: रामनवमी पूजा की सरल विधि इस प्रकार है:

  1. प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  2. घर के मंदिर में भगवान राम, माता सीता, लक्ष्मण और हनुमान जी की प्रतिमा स्थापित करें।
  3. द्वार पर हल्दी-कुमकुम लगाकर भगवान को घर आमंत्रित करें।
  4. भगवान का पंचामृत से अभिषेक करें और पीले वस्त्र अर्पित करें।
  5. चंदन, रोली, अक्षत, पुष्प और तुलसी दल चढ़ाएँ।
  6. धूप-दीप जलाकर ‘ॐ राम रामाय नमः’ मंत्र का जाप करें।
  7. रामरक्षा स्तोत्र या सुंदरकांड का पाठ करें।
  8. मध्याह्न में राम जन्मोत्सव मनाएँ और भगवान को खीर या पंजीरी का भोग लगाएँ।
  9. अंत में आरती करें।

प्रश्न 5: रामनवमी के दिन कौन-सी चीजें भोग में चढ़ानी चाहिए?

उत्तर: रामनवमी के दिन भगवान राम को खीर (चावल और दूध से बनी मिठाई) और पंजीरी (गेहूँ के आटे और गुड़ से बना मिष्ठान्न) का भोग विशेष रूप से प्रिय है । इसके अलावा, पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, शक्कर), मीठा चावल (पनकम), ताजे फल और मिठाई भी अर्पित की जा सकती है।

प्रश्न 6: क्या रामनवमी का व्रत रखना चाहिए?

उत्तर: हाँ, रामनवमी का व्रत रखना अत्यंत शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने और भगवान राम की विधिवत पूजा करने से घर में सुख-शांति बनी रहती है, मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और जीवन की बाधाएं दूर होती हैं । व्रत को अगले दिन सूर्योदय के बाद पारण किया जाता है।

प्रश्न 7: हनुमान जी का रामनवमी से क्या संबंध है?

उत्तर: हनुमान जी भगवान राम के परम भक्त और सेवक हैं। रामनवमी के दिन हनुमान जी की पूजा का विशेष महत्व है। पौराणिक कथा के अनुसार, जब भगवान विष्णु ने राम के रूप में अवतार लिया, तब भगवान शिव ने हनुमान के रूप में जन्म लिया ताकि वे सदा प्रभु राम की सेवा में तत्पर रह सकें । रामनवमी के दिन हनुमान जी को सिंदूर चढ़ाने की भी परंपरा है, जो उनके समर्पण और भक्ति का प्रतीक है।

प्रश्न 8: रामनवमी के दिन किन मंत्रों का जाप करना चाहिए?

उत्तर: रामनवमी के दिन निम्नलिखित मंत्रों का जाप अत्यंत लाभकारी माना गया है:

  • मूल मंत्र: “ॐ राम रामाय नमः” (कम से कम 108 बार जप करें)
  • राम तारक मंत्र: “श्री राम जय राम जय जय राम”
  • राम रक्षा स्तोत्र मंत्र: “रामाय रामभद्राय रामचंद्राय वेधसे। रघुनाथाय नाथाय सीताया पतये नमः।।”

प्रश्न 9: भारत के किन क्षेत्रों में रामनवमी विशेष रूप से मनाई जाती है?

उत्तर: रामनवमी पूरे भारत में धूमधाम से मनाई जाती है, लेकिन कुछ स्थान विशेष रूप से प्रसिद्ध हैं:

  • अयोध्या (उत्तर प्रदेश): यहाँ भव्य शोभा यात्राएँ और सरयू आरती होती है।
  • रामेश्वरम (तमिलनाडु): यहाँ विशाल रथयात्रा निकाली जाती है।
  • हैदराबाद (तेलंगाना): रामनवमी पर भव्य रामलीला का मंचन होता है।
  • नासिक और पुणे (महाराष्ट्र): कालाराम मंदिर और अन्य राम मंदिरों में विशेष आयोजन होते हैं।
  • आंध्र प्रदेश/तेलंगाना: ‘श्री राम कल्याणम’ का आयोजन होता है, जिसमें राम-सीता का दिव्य विवाह संपन्न कराया जाता है।

प्रश्न 10: रामनवमी के दिन घर पर रामध्वज क्यों फहराया जाता है?

उत्तर: रामनवमी के दिन घर की छत पर भगवा रंग का रामध्वज फहराने की परंपरा है। यह इस बात का प्रतीक है कि हमने अपने घर में भगवान राम का स्वागत किया है और उनके आदर्शों को अपने जीवन में स्थान दिया है। यह विजय और शुभता का प्रतीक माना जाता है ।

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