लक्ष्मी जी की स्तुति

🌺 लक्ष्मी जी की स्तुति | Lakshmi Ji Ki Stuti in Sanskrit with Meaning

🪔 लक्ष्मी स्तुति का महत्व

हिंदू धर्म में महालक्ष्मी को धन, वैभव, सौभाग्य, कीर्ति और आरोग्य की अधिष्ठात्री देवी कहा गया है।
मां लक्ष्मी की कृपा से जीवन में समृद्धि, सुख और शांति का वास होता है।

शुक्रवार, पूर्णिमा, और दीपावली के दिन इस स्तुति का पाठ करने से सभी प्रकार की दरिद्रता, बाधाएं और कष्ट समाप्त हो जाते हैं।
यह स्तुति अष्टलक्ष्मी के स्वरूपों की स्तुति है जो जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में सिद्धि प्रदान करती हैं।


🕉 लक्ष्मी जी की स्तुति (Lakshmi Ji Ki Stuti)

आदि लक्ष्मि नमस्तेऽस्तु परब्रह्म स्वरूपिणि।
यशो देहि धनं देहि सर्व कामांश्च देहि मे॥

सन्तान लक्ष्मि नमस्तेऽस्तु पुत्र-पौत्र प्रदायिनि।
पुत्रां देहि धनं देहि सर्व कामांश्च देहि मे॥

विद्या लक्ष्मि नमस्तेऽस्तु ब्रह्म विद्या स्वरूपिणि।
विद्यां देहि कलां देहि सर्व कामांश्च देहि मे॥

धन लक्ष्मि नमस्तेऽस्तु सर्व दारिद्र्य नाशिनि।
धनं देहि श्रियं देहि सर्व कामांश्च देहि मे॥

धान्य लक्ष्मि नमस्तेऽस्तु सर्वाभरण भूषिते।
धान्यं देहि धनं देहि सर्व कामांश्च देहि मे॥

मेधा लक्ष्मि नमस्तेऽस्तु कलि कल्मष नाशिनि।
प्रज्ञां देहि श्रियं देहि सर्व कामांश्च देहि मे॥

गज लक्ष्मि नमस्तेऽस्तु सर्वदेव स्वरूपिणि।
अश्वांश गोकुलं देहि सर्व कामांश्च देहि मे॥

धीर लक्ष्मि नमस्तेऽस्तु पराशक्ति स्वरूपिणि।
वीर्यं देहि बलं देहि सर्व कामांश्च देहि मे॥

जय लक्ष्मि नमस्तेऽस्तु सर्व कार्य जयप्रदे।
जयं देहि शुभं देहि सर्व कामांश्च देहि मे॥

भाग्य लक्ष्मि नमस्तेऽस्तु सौमाङ्गल्य विवर्धिनि।
भाग्यं देहि श्रियं देहि सर्व कामांश्च देहि मे॥

कीर्ति लक्ष्मि नमस्तेऽस्तु विष्णुवक्ष स्थल स्थिते।
कीर्तिं देहि श्रियं देहि सर्व कामांश्च देहि मे॥

आरोग्य लक्ष्मि नमस्तेऽस्तु सर्व रोग निवारणि।
आयुर्देहि श्रियं देहि सर्व कामांश्च देहि मे॥

सिद्ध लक्ष्मि नमस्तेऽस्तु सर्व सिद्धि प्रदायिनि।
सिद्धिं देहि श्रियं देहि सर्व कामांश्च देहि मे॥

सौन्दर्य लक्ष्मि नमस्तेऽस्तु सर्वालङ्कार शोभिते।
रूपं देहि श्रियं देहि सर्व कामांश्च देहि मे॥

साम्राज्य लक्ष्मि नमस्तेऽस्तु भुक्ति मुक्ति प्रदायिनि।
मोक्षं देहि श्रियं देहि सर्व कामांश्च देहि मे॥

मङ्गले मङ्गलाधारे माङ्गल्ये मङ्गल प्रदे।
मङ्गलार्थं मङ्गलेशि माङ्गल्यं देहि मे सदा॥

सर्व मङ्गल माङ्गल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके।
शरण्ये त्रयम्बके देवि नारायणि नमोऽस्तुते॥

शुभं भवतु कल्याणी आयुरारोग्य सम्पदाम्॥


🌸 स्तुति पाठ की विधि (How to Recite Lakshmi Stuti)

  1. शुक्रवार, पूर्णिमा या दीपावली की रात स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  2. लाल या पीले आसन पर बैठें और लक्ष्मी जी की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
  3. दीपक जलाकर सुगंधित धूप, पुष्प, मिष्ठान और चावल अर्पित करें।
  4. इस स्तुति का श्रद्धापूर्वक पाठ करें।
  5. पाठ के बाद “ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं महालक्ष्म्यै नमः” मंत्र का 108 बार जप करें।
  6. अंत में आरती करें और मां लक्ष्मी से अपनी मनोकामना कहें।

💰 लाभ (Benefits of Lakshmi Ji Ki Stuti)

  • धन और वैभव की प्राप्ति होती है 💵
  • कर्ज और दरिद्रता दूर होती है 🙏
  • परिवार में सुख-शांति बनी रहती है 🕊
  • संतान, विद्या और आरोग्य की वृद्धि होती है 🌸
  • सभी कार्यों में सफलता और भाग्य वृद्धि होती है 🌟
  • आत्मविश्वास, सौंदर्य और सौभाग्य में वृद्धि होती है ✨

🔱 निष्कर्ष

लक्ष्मी जी की स्तुति न केवल धन और वैभव का स्रोत है,
बल्कि यह आध्यात्मिक, मानसिक और पारिवारिक समृद्धि का भी मार्ग है।
नियमित रूप से श्रद्धा और भक्ति से इसका पाठ करने पर जीवन में स्थायी सुख और समृद्धि प्राप्त होती है।

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