Kuldevi Stotram

🌸 कुलदेवी स्तोत्र | Kuldevi Stotram with Hindi Meaning 🌸

🔱 कुलरक्षिणी माता की स्तुति जो हर युग में अपने भक्तों की रक्षा करती हैं।


🕉️ परिचय | Introduction

कुलदेवी वह शक्ति हैं जो प्रत्येक कुल (परिवार/वंश) की रक्षक मानी जाती हैं।
जैसे प्रत्येक व्यक्ति का इष्ट देव होता है, वैसे ही परिवार की कुलदेवी होती हैं जो उस वंश की रक्षा, समृद्धि और कल्याण का संकल्प धारण करती हैं।

“कुलदेवी स्तोत्र” प्राचीन वैदिक परंपरा से जुड़ा एक पवित्र स्तोत्र है।
जो व्यक्ति श्रद्धा और भक्ति से इस स्तोत्र का पाठ करता है, उसके कुल में सदैव शांति, वैभव, और मंगल बना रहता है।


🌺 ॥ कुलदेवी स्तोत्र ॥

(Kuldevi Stotram – Sanskrit Text with Hindi Meaning)

नमस्ते श्री शिवाय कुलाराध्या कुलेश्वरी।
कुलसंरक्षणी माता कौलिक ज्ञान प्रकाशीनी।।1।।

अर्थ:
हे कुल की आराध्या कुलेश्वरी देवी! आपको नमस्कार है।
आप ही हमारे कुल की रक्षा करने वाली माता हैं, जो कौलिक (गूढ़) ज्ञान को प्रकाशित करती हैं।

वन्दे श्री कुल पूज्या त्वाम् कुलाम्बा कुलरक्षिणी।
वेदमाता जगन्माता लोक माता हितैषिणी।।2।।

अर्थ:
हे कुल में पूजित माता कुलाम्बा!
आप वेदों की जननी हैं, जगत की माता हैं और समस्त लोकों का कल्याण चाहने वाली हैं।

आदि शक्ति समुद्भूता त्वया ही कुल स्वामिनी।
विश्ववंद्यां महाघोरां त्राहिमाम् शरणागत:।।3।।

अर्थ:
हे आदि शक्ति स्वरूपिणी देवी! आप कुल की स्वामिनी हैं।
आप विश्व में पूजित हैं और भय को नष्ट करने वाली हैं।
मैं आपकी शरण में हूँ, कृपा कर मेरी रक्षा करें।

त्रैलोक्य ह्रदयं शोभे देवी त्वं परमेश्वरी।
भक्तानुग्रह कारिणी कुलदेवी नमोस्तुते।।4।।

अर्थ:
हे त्रिलोक (तीनों लोक) के हृदय को शोभित करने वाली देवी!
आप परमेश्वरी हैं, भक्तों पर अनुग्रह करने वाली हैं।
आपको बार-बार नमस्कार है।

महादेव प्रियंकरी बालानां हितकारिणी।
कुलवृद्धि करी माता त्राहिमाम् शरणागतम्।।5।।

अर्थ:
हे महादेव की प्रिय सखी! आप बालकों का कल्याण करने वाली हैं।
आप कुल की वृद्धि करने वाली माता हैं, मुझे शरण में लेकर रक्षा करें।

चिदग्निमण्डल संभुता राज्य वैभव कारिणी।
प्रकटीतां सुरेशानी वन्दे त्वां “कुल गौरवाम्”।।6।।

अर्थ:
आप चिदग्नि (चैतन्य अग्नि) से उत्पन्न हुई हैं।
राज्य वैभव देने वाली और देवताओं की अधिष्ठात्री हैं।
मैं आपको वंदन करता हूँ, हे कुल की शोभा!

त्वदीये कुले जात: त्वामेव शरणम गत:!
त्वत वत्सलोहं आद्ये त्वं रक्ष रक्षाधुना।।7।।

अर्थ:
मैं आपके ही कुल में जन्मा हूँ और आपकी ही शरण में आया हूँ।
हे आद्ये! आप दयालु हैं, अब मेरी रक्षा करें।

पुत्रं देहि धनं देहि साम्राज्यं प्रदेहि मे|
सर्वदास्माकं कुले भूयात मंगलानु शाशनम ।।8।।

अर्थ:
हे देवी! मुझे पुत्र, धन और राज्य-सुख प्रदान करें।
हमारे कुल में सदा मंगल और समृद्धि बनी रहे।

कुलाष्टकमिदं पुण्यं नित्यं य: सुकृति पठेत।
तस्य वृद्धि कुले जात: प्रसन्ना कुलेश्वरी।।9।।

अर्थ:
जो व्यक्ति इस कुलाष्टक (आठ श्लोक वाले स्तोत्र) का नित्य पाठ करता है,
उसके कुल में वृद्धि होती है और कुलेश्वरी देवी सदा प्रसन्न रहती हैं।

कुलदेवी स्त्रोत्मिदम, सूपुण्यं ललितं तथा |
अर्पयामी भवत भक्त्या, त्राहिमां शिव गेहिनी ||10।।

अर्थ:
हे शिवगृहवासी देवी! यह पुण्य स्तोत्र मैं आपको भक्ति से अर्पित करता हूँ।
मुझे संकटों से बचाइए, हे करुणामयी माता।

🙏 ॥ श्री कुलदेव्यार्पणमस्तु ॥

❗जय महादेव ❗जय कुलेश्वरी माता❗


🌿 कुलदेवी स्तोत्र के पाठ का महत्व | Importance of Kuldevi Stotram

🔸 यह स्तोत्र कुल की रक्षा और उन्नति का प्रतीक है।
🔸 इसके पाठ से परिवार में शांति, सुख, और समृद्धि आती है।
🔸 कुलदेवी हर प्रकार के संकट, नकारात्मक ऊर्जा और दुर्भाग्य से रक्षा करती हैं।
🔸 नवरात्रि, पूर्णिमा या परिवारिक पूजा में इसका पाठ विशेष फलदायक होता है।


📿 पाठ विधि | How to Chant Properly

1️⃣ स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
2️⃣ दीपक और पुष्प से कुलदेवी का पूजन करें।
3️⃣ श्रद्धा भाव से इस स्तोत्र का पाठ करें।
4️⃣ पाठ के बाद परिवार की मंगलकामना करें।

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